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Thursday, July 30, 2020

सूक्ष्म कथा -६ (अधिकार)

सूक्ष्म कथा -६ (अधिकार)
'मैं' बोला - "वो मेरा है।" 'तुम' बोला -"वो मेरा है।" 
'मै' और 'तुम' के अधिकार-युद्ध में, कर्त्तव्य कहीं खो गया।
'वो' हताश असमंजस में - "मेरा अधिकार कहां खो गया।"

सूक्ष्म कथा - ५ (मकसद)

सूक्ष्म कथा - ५ (मकसद)
पंडाल में नेता जी दान दे रहे, वोट पाने के लिए।
कुछ आवारे साथ दे रहे, रात के जुगाड़ के लिए।
इक मां हाथ फैला, फोटो खिंचवा रही, रोटी बनाने के लिए।
इक पिता हाथ फैला, मुंह छुपा रहा, इज्जत बचाने के लिए।

Wednesday, July 29, 2020

सूक्ष्म कथा -४ (मेरी डायरी का एक पुराना पन्ना!)

मेरी डायरी का एक पुराना पन्ना!!

ये मैं हूँ ---
हमेशा स्वस्थ, सानंद, लोगों को ख़ुशी और प्यार देने वाला, हर कला और साहित्य  के प्रति अपने दिल में उमंग रखने वाला, हर क्षण में अपने लिए ख़ुशी पाने वाला, हर नए व्यक्ति से मित्रतापूर्ण रिश्ता कायम करता, अपने रिश्तों को जीने वाला, उन रिश्तों को अपने कष्टों से ऊपर मानकर सर्वस्व न्योछावर करने को उद्धत और अपने प्रति लोगों की स्नेहमयी दृष्टि और अपने ऊपर उनके भरोसे को ही अपनी सफलता और कर्मशीलता का आधार बनाता सतत कर्मरत, अथक और अपने जीवन से संतुष्ट I 

सूक्ष्म कथा -३ (कुल)

सूक्ष्म कथा -३ (कुल)
जामाता ने आखिर अपने श्वसुर से कह ही दिया - आपकी बेटी नए युग की सबला है, वो अपना कुल नहीं बदलेगी, अत:, मुझे अपने कुल में शामिल कर लिजिए।
श्वसुर हतप्रभ; नि: शब्द; सोच रहे - फिर क्या यह कुल  उनका है?

सूक्ष्म कथा -२ (विवाह)

सूक्ष्म कथा -२ (विवाह)
एक हठधर्मी शिशु मेले में पिता से हठवश वो खिलौना भी खरीदवा लेता है, जिसके वो योग्य नहीं है। ऐसा खिलौना घर के किसी कोने में टूटे-फूटे पड़ा रहता है।

सूक्ष्म कथा -१ (दायित्व)


आंधी-तूफान के मौसम में कई पेड़ गिर गए, टूटे घोंसले से बेघर बच्चों को एक बड़ी चिड़िया ने अपने पंखों में सहेज लिया, उष्म रखा, दाना दिया। तूफान टला, स्वस्थ बच्चे बड़े होकर उड़ गए। बड़ी चिड़िया कभी उन्हें, कभी अपने जर्जर पंख निहारती रही।