Thursday, March 8, 2018

काश, वर्षों से सबलीकरण का पर्व मनाती कोई स्त्री ये कहती कि बस हो चुका, अब मैं अबला नहीं, मुझे रोज रोज के स्त्रीवादी या यूँ कहें कि स्रिपोषक विचारधारा की जरुरत नहीं। या ये कहती कि अब हमें पुरुष - पूर्वज द्वारा स्त्री- पूर्वजों पर हुए कथित अत्याचार की दुहाई नहीं चाहिए।  और तदनुरूप अपने को सबल विकसित और उन्नत मानती।  पर, आह, ऐसा कोई दिन न आया न आएगा, अतः स्त्रियों का संरक्षण, आरक्षण और सबलीकरण जारी रखें, और ऐसे महिला दिवस का झुनझुना बजाते रहें।  इस पर्व की बधाइयाँ दे दे कर अहसास कराते रहें कि वो आज भी अब भी कमजोर हैं, अबला हैं, असक्षम हैं, अपूर्ण हैं और स्त्रीगण कृपया आप इस पर्व को अपनी मानसिक परतंत्रता ही समझें।  

Tuesday, January 2, 2018

That made me love.


First glimpse of your eyes filled with love, that made me love.
The hug you made, when we parted away, that made me love.
The soft soothing words, when my heart sunk, that made me love.
The dance you made on my home-coming, that made me love.
The naughty pinch you did on my waist, that made me love.
The touch of ur delicate lips at corner of mine, that made me love.
The fantasies you shared to fill my dreams, that made me love.
Those tears in eyes, when our feelings hurt, that made me love
Those fun filled time we shared alone, that made me love
Those funny gestures you made in crowd, that made me love
That love you made, that made me love, I always cherished.
Please love me again and for again and forever to make me love.

Friday, October 27, 2017

ये ज़ुल्फ़ों के वो दाम हैं हुज़ूर, ना बच पाओगे

शिकार गर हुश्न के हुए, इश्क़ में मर जाओगे

Tuesday, May 8, 2012

তুমি একা, আমি একা, এই জীবনের অন্ত -ও একা,
কেন ভাবে সবাই কর্মের ফল ও চিরান্তের লেখা I
তুমি ভাবো সময় আসলে , সব কিছু নিজে হয়ে যাবে,
আমি ভাবি কেন থাকবো বোসে দেখতে ভাগ্যের লেখা I

Wednesday, April 11, 2012

ऐ यार तुझसे अब क्या उम्मीद करूं
तूने तो मेरी ज़िन्दगी का तमाशा बना दिया

अपनी इन हसरतों को कहाँ छुपाया करूं
तूने इस आदमज़ात को खुदा समझा किया

लाख कोशिशें की, तेरे सितम पर बद्दुआ दिया करें
हमारे दिल को हमारी ये दुआ कबूल नहीं

किन्हें सताने चले थे हम?
उनकी इक आह पर हमें रोना आया

उस तस्वीर को हमने याद क्यूँ किया ?
जिसे भुलाने पर हमें सुकून मिला किया

सर झुकाकर सच्ची बात कही कि गलती हमारी थी
या, सच्ची बात कही - यही गलती हमारी थी?

हमें इस दर्द का कभी एहसास न होता,
काश इस रिश्ते की कभी आगाज़ न होती.

२०/०१/२००५
ख़ुशी की तलाश

जीवन में ख़ुशी कहाँ, ख़ुशी में जीवन ढूंढना,
स्थिति अपनी रही, यूँ ही आवारा घूमना I

                              आवारगी में आबरू बचाना मुश्किल,
                              क्या बद्दुओं में ख़ुशी मिलती है I

ख़ुशी बेशकीमती, मुंह छुपाये नहीं मिलती,
बिन जुबान को तो, दुआ भी नहीं मिलती I

                               ख़ुशी तो दिल में होती है, बंद कमरों कि तरह,
                               सड़क पर धूल में पड़ी भीख नहीं होती I

ख़ुशी तो पाक सौगात है, खैरात नहीं,
लेन-देन दोनों हैं, इक तरफा बात नहीं I

                               आवारा फिरने से, खाक मिली, राह नहीं,
                               ढूँढने को सौगात चले, दिल नहीं, कोई चाह नहीं I

राह में चलते गए, हर छोटी ख़ुशी चुनते,
और उन खुशियों की इक झीनी चादर बुनते I

                              राह की खुशियाँ कभी अपनी नहीं होती,
                              इनसे जीवन की कमी पूरी नहीं होती I

झीनी चादर ही रूह को गर्म कराती है,
आग की तपिश उसे सहन नहीं होती I

                             आग की तपिश ही सर्द जिस्म में अच्छी,
                             रूह की ठंढक क्या तब उष्म नहीं होती I

रूह को कम्पन से ख़ुशी मिलती है,
                            तन को गर्मी से सुकून मिलता है I
खाक में भी शरारा ढूंढना,
                            हर ख़ुशी में जीवन मिलता है I


२३/१०/२००२
पता न था .........
इक लम्बे अरसे में हासिल किया भरोसा टूट जाता है,
इक क्षण में, इक बात से, इक राज़ खुल जाने से I

पता न था .........
मुद्दतों - तन्हाई के बाद मिला यार छूट जाता है,
इक क्षण में, इक अहसास से, इक बार भरोसा टूट जाने से I

पता न था .........
पत्थर के इस दिल के अन्दर भी 'कुछ' टूट जाता है,
इक क्षण में, इस अकेलेपन से, इक यार छूट जाने से I

पता न था ..........
कभी जो न भरा, अश्कों का वो घड़ा फूट जाता है,
इक क्षण में, इक सोच से, इस 'कुछ' के टूट जाने से I

पता न था .......... पता न था ............ I